📢 शिक्षा की जमीन पर सियासी खेल? धनौरी के नेशनल इंटर कॉलेज की करोड़ों की भूमि बिक्री पर क्यों उठे सवाल?

हरिद्वार/धनौरी।
सन 1956 में क्षेत्र के बच्चों की शिक्षा और विकास के उद्देश्य से स्थापित नेशनल जूनियर हाई स्कूल धनौरी (वर्तमान में नेशनल इंटर कॉलेज) आज गंभीर आरोपों के घेरे में है। ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं ने कॉलेज प्रबंधन के प्रबंधक आदेश कुमार पर दान में मिली करोड़ों की जमीन को नियमों की अनदेखी कर बेचने का आरोप लगाया है।
आदेश कुमार के राजनीति में आज के समय में अच्छे संबंध बताए जा रहे हैं और उनकी बहन कल्पना सैनी भी बीजेपी राज्यसभा सांसद के पद पर आसीन हैं जिनकी राजनीतिक पद का आदेश कुमार पूरी तरह से फायदा उठा रहे हैं

🏫 1956 में मिला था 154 बीघा दान
जानकारी के अनुसार, वर्ष 1956 में शिवदासपुर (अप दिल्ली वाला) की ग्राम पंचायत भूमि प्रबंधन समिति द्वारा लगभग 154 बीघा भूमि शिक्षा कार्य के लिए दान की गई थी। उद्देश्य स्पष्ट था—क्षेत्र के बच्चों को बेहतर शिक्षा और संस्थान के विस्तार के लिए संसाधन उपलब्ध कराना।

💰 80 करोड़ की जमीन, बिकी मात्र 7.42 करोड़ में?
आरोप है कि वर्तमान प्रबंधक आदेश कुमार ने 5 फरवरी 2026 को रजिस्ट्री नंबर 01, जिल्द 9792, पृष्ठ 152, क्रमांक 1373 के तहत इस भूमि का विक्रय कर दिया।
विक्रय पत्र में लगभग ₹7 करोड़ 42 लाख 60 हजार की राशि दर्शाई गई, जबकि स्थानीय लोगों का दावा है कि जमीन की मौजूदा बाजार कीमत करीब 80 करोड़ रुपये के आसपास है।
ग्रामीणों का आरोप है कि—
क्या भूमि की बिक्री बिना किसी अधिकार के की गई?
, क्या किसी भी समाचार पत्र में टेंडर/बोली का विज्ञापन प्रकाशित नहीं कराया गया?
क्या सरकारी दर पर कम कीमत दिखाकर निजी लाभ के उद्देश्य से रजिस्ट्री कराई गई?
बिक्री की राशि अलग-अलग तिथियों में चेक के माध्यम से कॉलेज खाते में जमा की गई।
🧾 किन-किन के नाम हुई रजिस्ट्री?
विक्रय में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, वे मुख्यतः देहरादून और रुद्रप्रयाग निवासी बताए जा रहे हैं। जिनमे नाम पूरा वैभव गर्ग निवासी देहरादून बिशम्बर भट्ट निवासी रुद्रप्रयाग कांति राम निवासी रुद्रप्रयाग तथा सतीश प्रसाद भट्ट पुत्र जय कृष्ण भट्ट आदि जोगीवाला देहरादून और आस पास के निवासी हैं
ग्रामीणों का आरोप है कि ये सभी प्रबंधक के करीबी बताए जाते हैं।
⚖️ प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग
शिकायतकर्ता (तेलीवाला) सहित क्षेत्रवासियों ने सचिव शिक्षा, निदेशक शिक्षा, महानिदेशक माध्यमिक शिक्षा, जिलाधिकारी हरिद्वार और मुख्य शिक्षा अधिकारी को लिखित शिकायत भेजी है।
उनकी प्रमुख मांगें हैं—
भूमि की दाखिल-खारिज पर तत्काल रोक
कॉलेज खाते में जमा ज़मीन के एवज मे आयी धनराशि पर रोक लगाकर खाता सील किया जाये
प्रबंधन समिति भंग कर प्रशासक नियुक्त किया जाए
बेची गई जमीन पुनः कॉलेज के नाम दर्ज की जाए
पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए
🔎 सवाल जो जवाब मांगते हैं
क्या दान में मिली शैक्षिक भूमि को बेचना कानूनी रूप से वैध था?
क्या बिक्री से पहले पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई?
क्या प्रबंधक को संपत्ति विक्रय का अधिकार प्राप्त था?
क्या भूमि का वास्तविक मूल्यांकन कराया गया?
📌 क्षेत्र में आक्रोश
ग्रामीणों का कहना है कि “जिस जमीन को हमारे बुजुर्गों ने बच्चों की शिक्षा के लिए दान दिया था, उसे निजी लाभ के लिए बेचना क्षेत्र के साथ विश्वासघात है।”
अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि आरोप सही पाए गए तो यह मामला उत्तराखंड में शिक्षा संस्थानों की संपत्ति प्रबंधन व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा कर सकता है।


