हरिद्वार सनत शर्मा :- दोस्ती, शराब और एक मोबाइल… गन्ने के खेत में दबी खौफनाक सच्चाई

लक्सर।
पांच दिनों से लापता एक युवक…
मां की आंखों में इंतज़ार…
गांव में तलाश का शोर…
और उसी तलाश में सबसे आगे चल रहा था — कातिल दोस्त।
कोतवाली लक्सर क्षेत्र में सन्नी हत्याकांड ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। जो कहानी गुमशुदगी से शुरू हुई, उसका अंत गन्ने के खेत में दबी एक खामोश लाश और दोस्ती पर लगे खून के दाग के साथ हुआ।
गुमशुदगी या सोची-समझी साजिश?

30 जनवरी को रसूलपुर उर्फ कंकरखाता निवासी महिला ने अपने 20 वर्षीय बेटे सन्नी के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई। बताया गया कि सन्नी दोस्तों के साथ गया था, लेकिन लौटकर नहीं आया। पुलिस ने तलाश शुरू की, गांव-गांव पूछताछ हुई, जंगल खंगाले गए…
लेकिन हर सवाल का जवाब धुंध में छिपा रहा।
जिस दोस्त पर था भरोसा, वही निकला कातिल
जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, पुलिस की नजर सन्नी के करीबी दोस्त रोहित उर्फ बालू पर टिकने लगी। उसके बयानों में विरोधाभास थे, व्यवहार बनावटी था।
सख्ती से पूछताछ हुई…
और फिर टूट गया वो राज़, जो 5 दिन से गन्ने के खेत में दफन था।
रोहित ने कबूल किया —
उसने अपने ही दोस्त सन्नी की गला दबाकर हत्या कर दी थी।
कत्ल की वजह: एक मोबाइल और शराब का नशा
27 जनवरी को सन्नी, रोहित और राजा सुल्तानपुर गए थे। वहां सन्नी के पहचान पत्र और पैसों से रोहित ने किश्तों पर रेडमी मोबाइल खरीदा।
शराब पी गई…
नशा चढ़ा…
और जंगल में मोबाइल को लेकर मामूली झगड़ा अचानक मौत में बदल गया।
नशे में धुत रोहित ने सन्नी का गला दबा दिया। जब होश आया, तो सामने दोस्त की लाश थी। डर के मारे शव को पास के गन्ने के खेत में छिपाया और गांव लौट आया।
सबसे चौंकाने वाली बात —
रोहित गांव में सन्नी को ढूंढने का नाटक करता रहा।
खेत से निकली सच्चाई
1 फरवरी को आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने गन्ने के खेत से सन्नी का शव बरामद किया। दोस्ती की आड़ में छिपी वह दरिंदगी अब सबके सामने थी।
तेजतर्रार पुलिस खुलासा
कप्तान डोबाल के नेतृत्व में हरिद्वार पुलिस की सटीक जांच, सबूतों की कड़ी और मनोवैज्ञानिक पूछताछ ने इस रहस्य से पर्दा उठा दिया।
सवाल जो अब भी हवा में हैं…
क्या एक मोबाइल की कीमत एक जान से ज्यादा थी?
नशा इंसान को दोस्त से कातिल कब बना देता है?
और क्या हम अपने सबसे करीबी चेहरों को सच में पहचान पाते हैं?
गन्ने के खेत में दबी लाश ने ये तो साबित कर दिया —
कभी-कभी सबसे बड़ा खतरा, सबसे करीबी दोस्त होता है।


